Jadavpur University Saffron March: शुभेंदु की ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ से बंगाल की राजनीति में नया तूफान, BJP के सामने RSS की भी बड़ी चेतावनी
Jadavpur University Saffron March: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर जादवपुर विश्वविद्यालय केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी 9 सितंबर को गोलपार्क से जादवपुर विश्वविद्यालय तक ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ निकालने वाले हैं। इस यात्रा को लेकर बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
लेकिन कहानी सिर्फ एक राजनीतिक मार्च की नहीं है।

एक तरफ BJP सरकार जादवपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रवाद, कैंपस अनुशासन और सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बना रही है। दूसरी तरफ विपक्ष इसे विश्वविद्यालय की राजनीति में सरकार के बढ़ते हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है।
और इसी बीच BJP के वैचारिक परिवार यानी RSS से जुड़े एक बंगाली साप्ताहिक ने खुद BJP को चेतावनी दी है कि अगर जनता को लगा कि नई BJP भी पुरानी TMC जैसी बन रही है, तो पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
तो आखिर जादवपुर में हो क्या रहा है?
और क्या ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ सिर्फ एक मार्च है या 2026 के बाद बदल चुकी बंगाल की राजनीति का बड़ा संकेत?
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9 सितंबर को क्या होने वाला है?
रिपोर्टों के मुताबिक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी 9 सितंबर, बुधवार को गोलपार्क से जादवपुर विश्वविद्यालय के पास 8B बस स्टैंड तक ‘Saffron Samman Yatra’ का नेतृत्व करेंगे।
यात्रा गोलपार्क से शुरू होकर धाकुरिया होते हुए जादवपुर इलाके तक जाएगी। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य भगवा रंग से जुड़े त्याग, समर्पण और सनातन परंपरा के मूल्यों को सामने रखना है।
यानी BJP इसे केवल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर पेश नहीं कर रही, बल्कि इसे ‘गेरुआ सम्मान’ और राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ रही है।
लेकिन राजनीतिक संदेश इससे कहीं बड़ा है।
क्योंकि यात्रा का अंतिम पड़ाव जादवपुर विश्वविद्यालय के आसपास रखा गया है।
और पिछले कुछ दिनों से इसी विश्वविद्यालय को लेकर लगातार राजनीतिक विवाद चल रहा है।
आखिर जादवपुर विश्वविद्यालय ही क्यों?
जादवपुर विश्वविद्यालय बंगाल की राजनीति में लंबे समय से एक बेहद संवेदनशील राजनीतिक और वैचारिक केंद्र रहा है।
हाल के दिनों में विश्वविद्यालय परिसर में ABVP और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच टकराव और नारेबाजी को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद विश्वविद्यालय की दीवारों पर अलग-अलग राजनीतिक नारों को लेकर भी तनाव बढ़ा।
इसी दौरान BJP विधायक शारबरी मुखर्जी ने विश्वविद्यालय का नाम बदलकर श्री अरविंद के नाम पर रखने की मांग की थी।
लेकिन BJP प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने साफ किया कि यह BJP या सरकार का आधिकारिक एजेंडा नहीं है और विधायक का बयान व्यक्तिगत राय है।
यहीं से सवाल उठता है—
क्या BJP सरकार विकास और प्रशासन के मुद्दों पर ध्यान देगी या बंगाल के विश्वविद्यालयों की वैचारिक राजनीति में भी उतरती जाएगी?
शुभेंदु अधिकारी का कैंपस को लेकर क्या कहना है?
शुभेंदु अधिकारी पहले भी जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर काफी आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं।
हाल में ‘10 हजार आवाजों में वंदे मातरम्’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में राजनीतिक माहौल, छात्रावासों में कथित दबाव और कैंपस की स्थिति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने राष्ट्रवादी और देशभक्ति की विचारधारा को मजबूत करने की बात कही थी।
अब ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ उसी राजनीतिक narrative को आगे बढ़ाती हुई दिखाई दे रही है।
यानी BJP का संदेश कुछ इस तरह समझा जा सकता है—
“जादवपुर सिर्फ वामपंथी राजनीति का गढ़ नहीं रहेगा।”
हालांकि यह एक राजनीतिक विश्लेषण है; BJP की घोषित यात्रा का उद्देश्य गेरुआ रंग से जुड़े मूल्यों और सम्मान को सामने रखना बताया गया है।
शमीक भट्टाचार्य का बयान और बढ़ा विवाद
इस पूरे विवाद के बीच BJP के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य का एक बयान भी चर्चा में है।
उन्होंने विश्वविद्यालयों में कथित भारत-विरोधी नारों को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया और कहा कि देश को तोड़ने वाले नारे लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उनका कहना था कि BJP विश्वविद्यालय परिसरों में पार्टी की राजनीति करने के पक्ष में नहीं है और सरकार भी विश्वविद्यालयों में पुलिस भेजने के पक्ष में नहीं है।
लेकिन दूसरी तरफ अब मुख्यमंत्री खुद जादवपुर की ओर एक बड़े राजनीतिक मार्च का नेतृत्व करने वाले हैं।
यही विरोधाभास आने वाले दिनों में विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
TMC को मिल गया नया हमला?
तृणमूल कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को आसानी से BJP के खिलाफ इस्तेमाल कर सकती है।
विपक्ष का तर्क हो सकता है कि सरकार को रोजगार, शिक्षा, उद्योग, बाढ़ और प्रशासन जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि विश्वविद्यालयों के नाम और वैचारिक पहचान को लेकर राजनीति करनी चाहिए।
हाल ही में Indian Express की रिपोर्ट में भी बताया गया कि BJP सरकार के शुरुआती महीनों में जादवपुर विवाद और अखबार के कार्यालय के बाहर हुई घटना जैसी कई चीजों ने विवाद पैदा किया है।
TMC नेता कुणाल घोष ने इन घटनाओं को लेकर BJP पर निशाना साधा है और आरोप लगाया कि पार्टी की राजनीति में नाम बदलने, रंग बदलने और राजनीतिक दबाव जैसी चीजें प्रमुख हो रही हैं।
हालांकि BJP इन आरोपों से सहमत नहीं है।
सबसे दिलचस्प बात: BJP को RSS से ही चेतावनी क्यों?
यह इस पूरी कहानी का शायद सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
RSS से जुड़े बंगाली साप्ताहिक Swastika ने हाल में BJP के लिए चेतावनी जारी की।
लेख में कहा गया कि बंगाल में BJP की सबसे बड़ी चुनौती अब विपक्षी पार्टियां नहीं बल्कि जनता का भरोसा बनाए रखना है।
लेख में यहां तक कहा गया कि अगर सिर्फ 2 प्रतिशत मतदाताओं को भी यह लगने लगा कि मौजूदा BJP वही राजनीतिक संस्कृति अपना रही है जिसे लोगों ने TMC के 15 साल के शासन में नकार दिया था, तो 90 प्रतिशत मतदाता BJP से दूर जा सकते हैं। यह पत्रिका का राजनीतिक आकलन है, कोई स्वतंत्र चुनावी सर्वेक्षण नहीं।
यही बात इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बनाती है।
क्योंकि BJP अभी सत्ता में नई है।
लोगों ने 2026 में बदलाव के लिए वोट किया।
अब जनता BJP से सिर्फ TMC को हराने की उम्मीद नहीं करेगी।
जनता परिणाम भी मांगेगी।
BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
नई सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल शायद यही है—
क्या वह TMC के खिलाफ बने गुस्से को लंबे समय की राजनीतिक लोकप्रियता में बदल पाएगी?
सत्ता में आने के बाद किसी भी पार्टी के सामने दो रास्ते होते हैं।
पहला—लगातार पुराने शासन की गलतियां गिनाना।
दूसरा—अपना शासन मॉडल जनता के सामने साबित करना।
BJP के सामने अब दूसरा रास्ता ज्यादा महत्वपूर्ण है।
अगर सरकार रोजगार, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और प्रशासन में ठोस बदलाव दिखाती है तो राजनीतिक फायदा लंबे समय तक रह सकता है।
लेकिन अगर जनता को लगता है कि सिर्फ राजनीतिक प्रतीकों और नारों पर ज्यादा जोर है और रोजमर्रा की समस्याएं पीछे छूट रही हैं, तो विपक्ष को मौका मिल सकता है।
यही चिंता RSS से जुड़े लेख में भी दिखाई देती है।
क्या जादवपुर BJP की नई राजनीतिक प्रयोगशाला बन रहा है?
यह सवाल अभी पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन घटनाओं को साथ रखकर देखें तो जादवपुर तेजी से BJP की राष्ट्रवादी राजनीति के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आ रहा है।
पहले ‘10 हजार आवाजों में वंदे मातरम्’।
अब ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’।
इसके साथ विश्वविद्यालय में ABVP और वाम छात्र संगठनों के बीच विवाद।
दीवारों पर राजनीतिक नारे।
नाम बदलने की मांग।
और BJP नेताओं के राष्ट्रवाद पर लगातार बयान।
इन सभी घटनाओं ने जादवपुर को फिर से बंगाल की राजनीतिक headlines में ला दिया है।
लेकिन BJP के अंदर भी सब कुछ आसान नहीं
बाहर से देखने पर BJP के पास बंगाल में मजबूत राजनीतिक स्थिति दिखाई देती है।
लेकिन पार्टी के सामने संगठन विस्तार और नए लोगों को पार्टी में शामिल करने की चुनौती भी है।
Indian Express की रिपोर्ट में एक BJP नेता के हवाले से बताया गया कि पार्टी तेजी से विस्तार के बाद संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है और कई नए लोगों को BJP तथा RSS की कार्यशैली की पर्याप्त जानकारी नहीं है।
यानी चुनाव जीतना एक बात है।
संगठन चलाना दूसरी।
और सरकार चलाना उससे भी बड़ी चुनौती।
क्या ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ से बंगाल की राजनीति बदलेगी?
इसका जवाब अभी देना जल्दबाजी होगा।
लेकिन इतना साफ है कि BJP बंगाल में अपनी राजनीतिक पहचान को केवल TMC विरोध तक सीमित नहीं रखना चाहती।
वह राष्ट्रवाद, सनातन, सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक बदलाव को अपने राजनीतिक narrative का हिस्सा बनाना चाहती है।
जादवपुर विश्वविद्यालय इस narrative के लिए एक बेहद प्रतीकात्मक जगह है।
क्योंकि जादवपुर का नाम लंबे समय से बंगाल की वामपंथी छात्र राजनीति और वैचारिक बहसों से जुड़ा रहा है।
इसलिए गोलपार्क से जादवपुर तक की यह यात्रा सिर्फ कुछ किलोमीटर की दूरी नहीं है।
यह बंगाल की बदलती राजनीतिक दिशा का प्रतीक भी बन सकती है।
निष्कर्ष: असली लड़ाई अब शुरू हुई है
पश्चिम बंगाल में 2026 के सत्ता परिवर्तन के बाद BJP सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष को हराना नहीं, बल्कि जनता का भरोसा बनाए रखना है।
9 सितंबर की ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ जादवपुर विश्वविद्यालय को फिर से राजनीतिक केंद्र में ला सकती है।
लेकिन इसी समय RSS से जुड़े साप्ताहिक की चेतावनी भी BJP के लिए महत्वपूर्ण है—सत्ता में आने के बाद अगर पार्टी जनता को यह भरोसा नहीं दिला पाती कि वह पिछली सरकार से अलग तरीके से काम करेगी, तो राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
अब असली सवाल यह है—
क्या शुभेंदु अधिकारी जादवपुर के जरिए बंगाल में नया राष्ट्रवादी राजनीतिक मॉडल खड़ा कर पाएंगे, या विश्वविद्यालय की राजनीति ही BJP के लिए नया विवाद बन जाएगी?
इसका जवाब आने वाले कुछ महीनों में दिखाई देना शुरू हो सकता है।
ऐसी ही बंगाल की राजनीति, BJP-TMC संघर्ष और देश की बड़ी राजनीतिक खबरों के विश्लेषण के लिए Cerkel.in पढ़ते रहें।
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